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नए पाठ्यक्रम {Syllabus} योजना में 6 साल की उम्र तक कोई बुक नहीं

Updated: Feb 20, 2023


इस बार धर्मेंद्र प्रधान केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने 3 से 8 साल के बच्चों के लिए नई दिल्ली में नया राष्ट्रीय पाठ्यक्रम ढांचा (एनसीएफ) बनाया है। साथ ही इस ढांचे {NCF} को लांच किया है, ऐसा ढांचा NCF} देश में पहली बार आएगा जो कि छोटे बच्चों के लिए पहला एकीकृत पाठ्यक्रम होगा।


धर्मेंद्र प्रधान केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने तीन से छह साल की उम्र के बच्चों के लिए खिलौनों पर आधारित खेल-खेल में शिक्षा कहानियो और शिक्षण की पारंपरिक अवधारणाओ नेतिक जागरूकता भारतीय नायको की कहानियो आदि को मुलभुत पाठयक्रम में सम्मलित किया है, जो देश में नए बच्चों के लिए इस प्रकार का प्रथम पाठ्यक्रम है। हमारी नयी पीढ़ी को पाठ्य पुस्तकों की रूढ़ी वादिओ से बचना चाहिए एवं जीवन में व्यावहारिक ज्ञान, सही शिक्षा प्रणाली को अपनाना चाहिए । केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मंद्र प्रधान जी ने कहा की NCF के चार चरण होगे -

  • नींव

  • प्रारंभिक बचपन की देखभाल

  • प्रारंभिक स्तर के लिए शिक्षा

  • मध्य और माध्यमिक शिक्षा के लिए शिक्षा

शोध से पता चला है की किसी व्यक्ति के दिमाग का 85% से ज्यादा विकास 6 से 8 वर्ष की उम्र तक हो जाता है ,इसलिए यह बहुत चुनौती भरा कार्य है ,की इस उम्र के बच्चों को क्या सिखाना चाहिए । मंत्री ने कहा की NCERT द्वारा इस ढांचे के आधार पर जनवरी २०२३ तक आधारभूत चरण के लिए पाठ्य पुस्तके , शिक्षाप्रणाली एवं , शिक्षा सामग्री तैयार की जाएगी।

NCF नर्सरी से कक्षा २ तक पढने वाले बच्चों के लिए स्कूलों आन्गनबाडीयो में नींव के चरण का अध्यापन का आधार होगा यह ढाँचा विद्यार्थियों केलिए तथा विद्यालय शिक्षा के लिए समग्र राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा का आधारभूत हिस्सा होगा एवं इसमें 18 वर्ष की आयु तक के बच्चो की भी शिक्षा शामिल होगी ।


शिक्षा के इस ढाँचे एवं इसे सम्मलित चरणों की परिवर्तन कारी प्रकृति से शिक्षा की सामग्री एवं परिणामो में गुणात्मक सुधार होने की आशा है जिसके फलस्वरूप बच्चों के बेहतर भविष्य का निर्माण किया जा सके। एक बच्चे के विकास की नींव ही गुणवत्ता की शिक्षा पर टिकी है , जिससे हमे एवं राष्ट्र को सकारात्मक परिणाम प्राप्त हो सकेंगे।


भारतीय सन्दर्भ में पाठ्यपुस्तकों एवं शिक्षा सामग्री के चुनाव में विविधता और समावेश को बनाये रखना महत्वपूर्ण है। पाठ्य पुस्तकों में रुढीवादिताओ को बढावा देने से बचना चाहिए एवं उदाहरण , कहानियो , पात्रो, चित्रों के उपयोग के माध्यम से अध्यन की जटिलता कम करनी चाहिए ।


दस्तावेज़ में कहा गया है कि तीन से छह साल की उम्र के लिए, बच्चों के लिए कोई निर्धारित पाठ्यपुस्तक नहीं होनी चाहिए, उसके स्थान पर शैक्षणिक आवश्यकताओं के लिए सरल एवं उदाहरण, चित्रों से परिपूर्ण गतिविधि पाठ्य पुस्तकों की सिफारिश की जाती है। इस उम्र के बच्चों पर निर्धारित पाठ्यपुस्तकों का बोझ नही होना चाहिए।



इस उम्र के बच्चों के लिए पाठ्य पुस्तके अनुपयोगी हो सकती है, इसके बजाये गतिविधि पुस्तके शिक्षको को गतिवधियो और सिखने के अनुभवों का मार्गदर्शन कर सकती है।


नैतिक और नैतिक जागरूकता और तर्क को NCF ने कक्षा की गतिविधियों एवं पाठ्य कर्मो में शामिल करने पर जोर दिया है। देश भक्ति, बलिदान , अहिंसा , सत्य , ईमानदारी, शांति , क्षमा , सहानुभूति , सहायकता ,शिष्टाचार, स्वछता , समानता , आदि जैसे मूल्यों को भी शामिल करने पर जोर दिया है एवं भारतीय परम्परा से अन्य दंतकथाएं और प्ररक कहानियो को भी सम्मलित किया है ।NCF ने इस बात पर भी जोर दिया है की बच्चों को अपनी घर की भाषा या मातृभाषा के द्वारास्वयं को व्यक्त करने , बातचीत करने और सिखने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए ,क्योकि मातृभाषा बच्चों के लिए उनके व्यक्तिगत , समाजिक और सांस्क्रतिक पहचान को दर्शाता है ।


एनसीएफ ने शिक्षकों को सशक्त बनाने पर उनके प्रशिक्षण , बुनयादी ढाँचेऔर अन्य सुविधाओ के मामले में ध्यान केन्द्रित किया है एवं इस पर भी संकेत दिए है की सिखने किए माहोल को कैसे डिजाईन किया जाना चाहिए। इनडोर वातावरण को अच्छी तरह हवादार होना चाहिए क्योकि यह बच्चों के लिए सुरक्षित सरल और अच्छा महसूस कराने वाला होता है।



NCF ने ढाँचे में शिक्षा के पंचकोश प्रणाली जो सूचीबद्ध किया है जो इस प्रकार है -

  • शारीरिक विकास

  • प्राणिक विकास {जीवन ऊर्जा का विकास}

  • भावनात्मक और मानसिक विकास (मानसिक विकास)

  • बौद्धिक विकास

  • आध्यात्मिक विकास (चैतिक विकास)

"पंचकोश मानव जीवन की लिए और उनके शरीर-मन परिसर के लिए अति महत्वपूर्ण है। यह जीवन का सही मार्गदर्शन करता है’’


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